छतरपुर

ईशानगर :- कई वर्षों से नही बनी सड़क, कीचड़ से निकलने को मजबूर ग्रामीण

अरविंद असाटी एमपीसीजी एक्सप्रेस न्यूज़

कई वर्षों से नही बनी सड़क, ग्रामीण सकरा रोड़ में मचे कीचड़ से निकलने को मजबूर

बारिश के चलते पूरे सकरा में भरा पानी, पानी से पैदल होकर निकलने को मजबूर लोग

पैदल तक निकलने में भारी दिक्कतों का करना पड़ता सामना

ईशानगर :- क्षेत्र ग्राम पंचायत बिहटा के मजरा पठार के ग्रामीण कई वर्षों से सकरा में से निकलने को मजबूर बरसात के मौसम में पूरे सकरा में भरा पानी हर सुविधा के लिये मोहताज ग्रामीण। ग्रामीणों को सकरा में भरे बारिश के पानी से होकर आवागमन करना पड़ रहा है। ग्राम बिहटा पंचायत के मजरा पठार का पहुँच मार्ग डेढ किलोमीटर का है लेकिन न तो कई वर्षों से ग्राम पंचायत बिहटा ने रोड़ डलवाया है न ही प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के अंतर्गत अभी तक ग्राम वासियों को रोड़ का लाभ मिल रहा है। गांव के बाशिंदों को अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है सरपंच के साथ साथ जन प्रतिनिधियों से सड़क निर्माण के लिए कई बार मांग कर चुके हैं। जब जब चुनाव आते है सभी के द्वारा बोला जाता है कि चुनाव बाद रोड़ डलवा देंगे लेकिन जैसे ही चुनाव हुये सरपंच व प्रितिनिधि चुने गये तो सारे वादे भी भूल गये। ग्रामीणों द्वारा ग्राम पंचायत एवं जन प्रितिनिधि को भी ज्ञापन सौंपकर सड़क की हालत पूर्व में कई बार बता चुके हैं। इसके बाद भी सड़क निर्माण करवाने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया, जिसके कारण बारिश में ही सकरा दल दल के रूप में तब्दील हो जाता हैं।

दलदल बना मार्ग

ग्राम पंचायत बिहटा से मजरा पठा गांव जाने वाली सड़क पूरी तरह से दलदल में तब्दील हो गई है। जगह-जगह पर बारिश का पानी भरने के कारण न तो गांव में सरकारी सुविधाओं का लाभ मिल रहा है और न ही किसी भी एमरजेंसी के वाहन पहुँच पा रहे है। ग्रामीणों का आरोप है कि हमारे परिवार वालों की तबियत जब खराब होती है तो एम्बुलेंस को बुलाया जाता है लेकिन रोड़ न होने के कारण डेढ़ किलोमीटर बिहटा गांव तक बड़ी समस्या में लाया जाता है व तब कहीं जाकर ईशानगर अस्पताल लाया जाता है।अभी आगे चल के स्कूल चालू हो जाने है तो हमारे बच्चों को स्कूल आने जाने मे असमर्थ रहते है। जो बच्चे स्कूल जाने के लिए अपने घर से निकले उन बच्चों की डे्रस कीचड़ में खराब हो जाती है।

वही सरमन यादव , कलाम खां, बालकिशन रैकवार मजरा पठा का कहना है कि जब हमारे गांव में किसी की तबियत खराब हो जाती है तो खटिया पर लेकर डेढ़ किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ता है तब कहीं जाकर एम्बुलेंस वाहन से अस्पताल लेकर जाते है क्योंकि हमारे ग्राम तक सकरा में कीचड़ की वजह से कोई भी वाहन नही निकल सकता क्योंकि बरसात में सकरा में दल दल मच जाती है व गाड़ी शिल्प होकर रोड़ छोड़कर चलने लगती है। हमारे गांव के कई सरपंच बदल गये मगर किसी भी सरपंच द्वारा डेढ़ किलोमीटर का रोड़ नही डलवा पाये। जिसकी मांग हम ग्रामवासियों द्वारा हर बार की जाती है मगर आज तक वोट लेने के बाद रोड़ नही डलवाया है।
टीका रैकवार सल्लू रैकवार राजू रैकवार बालकिशन रैकवार सरमन यादव घनसु अहिरवार गणेश पाल छक्की यादव पप्पू रजक मुन्ना रजक सहित ग्रामीणों का कहना है कि अगर हमारे ग्राम का शासन द्वारा अगर रोड़ नही डाला जाता तो हम ग्रामवासी रोड के लिये अनशन पर बैठेगे।

इनका कहना है – हमारे द्वारा कई बार प्रस्ताव भेजा गया है मगर रोड़ पास नही हुआ रोड़ पास न होने की वजह है कि जो सकरा मजरा पठार के लिये गया वह कुछ सरकारी जमीन में है और कुछ निजी लोंगो की जमीन है इसलिये वह रोड़ नही डल पा रहा है। हमारे द्वारा निजी खर्चे पर नाली का निर्माण व स्कूल तक रोड़ डलवाया गया है।।  सरपंच प्रितिनिधि लल्लू पटैरिया बिहटा 

जब इस सम्बंध में ग्राम के सचिव सुखलाल यादव से बात की तो उनका भी यही कहना था कि हमने रोड़ का प्रस्ताव भेजा था मगर सकरा से रोड़ गई है वह कुछ सरकारी व कुछ निजी लोंगो की है जिस कारण रोड़ का कार्य नही हो पा रहा है अब हमने प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के अंतर्गत प्रस्ताव भेज दिया है।

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