राजनैतिक

क्या प्रहलाद पटेल पर भरोसा जता सकता हैं भाजपा हाईकमान – बदलाव की बयार

वरिष्ठ पत्रकार धीरज चतुर्वेदी की कलम

क्या प्रहलाद पटेल पर भरोसा जता सकता हैं भाजपा हाईकमान
– बदलाव की बयार

देश का मौसम भी करवटे ले रहा हैं, ठीक उसी तरह मप्र की राजनीति में आल इज वेल नज़र नहीं आ रहा। पार्टी के ताकतवर नेताओं के बीच एकांत गुप्तगु संकेत दे रहा हैं कि यह खामोश मेल मिलाप किसी तूफान का संकेत हैं। क्या बदलाव की बयार के झोंको में कुछ पेड़ उखड़ने वाले हैं, दिशा और दिशा तो इस ओर ही इशारा करती हैं। खबरों के अनुसार मुख्यमंत्री को बदला जा सकता हैं। कई नाम सामने आ रहे हैं जिनमें प्रहलाद पटेल का भी नाम हैं। इसके पहले भी जब कभी मुख्यमंत्री का चेहरा बदलने की सुगबुगाहटे में प्रहलाद पटेल का नाम उछल कर आया। ज्ञात हों कि कोरोना काल में भाजपा की छवि को गहरा धक्का पंहुचा हैं। नौकरशाही के आतंकी रवैये और जीवन रक्षक उपकरणों, दवाइयो के आभाव में शमशान घाटों पर चिताओं के ढेर नज़र आये। पूरे काल के समय अफरा तफरी और अराजक माहौल को देखा गया। कोई ऑक्सीजन के लिये तो कोई इंजेक्शन के लिये बदहवास हालात में मरीज के परिजन भागते दिखे। इस माहौल के कारण भाजपा पर बदनामी का ठीकरा जड़ गया हैं। बीजेपी का हाईकमान इस कलंकित छवि को बदलने के लिये उप्र सहित मप्र में चेहरों में बदलाव कर सकता हैं। पिछले कुछ दिनों से कैलाश विजयवर्गीय भी मप्र की राजनीति में सक्रिय नज़र आ रहे हैं। राजनैतिक गलियारों में कहा जाता हैं कि कैलाश और शिव के बीच संबंधों में खटास का पुट हैं। इधर कोरोना काल में धूमिल साख को पुनः जीवित करने की क़वायदे और कैलाश विजयवर्गीय का सक्रिय होना इन शंकाओ को जन्म देता हैं कि कुछ पक रहा हैं। अगर यह खिचड़ी पक जाती हैं तो मुख्यमंत्री का बदलना तय माना जा रहा हैं। बदलाव में कौन नया चेहरा होगा जिसमे प्रहलाद पटेल की रफ़्तार अधिक हैं। केंद्र में मंत्री प्रहलाद पटेल को केंद्रीय हाईकमान का विश्वासी माना जाता हैं। पिछड़ा वर्ग के होने से जातिगत गुणाभाग में भी वह फिट साबित होते हैं। सबसे महत्वपूर्ण हैं कि उनमे परिस्थितियों से निपटने में माहिरता हैं। यह केवल चर्चाये हैं,। राजनीति भी सम्भावनाओं का खेल हैं। कौन कब कैसे हासिये पर चला जाये और किसके किस्मत के दरवाजे खुल जाये, इसका पूर्व आंकलन नहीं किया जा सकता. पर यह अवश्य हैं कि मप्र के मुख्यमंत्री का चेहरा बदलता हैं तो कुर्सी की रेस में प्रहलाद पटेल की दावेदारी को सिरे से नजर अंदाज नहीं किया जा सकता।

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