छतरपुर

बकस्वाहा-किसान की उपज का समर्थन मूल्य तो दूर बाजार भाव के भी नही मिले पैसे दो साल से भटक रहे किसान

एमपीसीजी एक्सप्रेस न्यूज

गरीब किसानों को ठगने का सिलसिला जारी
जनकल्याणकारी योजनाओं को सेंध लगाते शासकीय नुमाइंदे


बक्सवाहा। जहां एक ओर पिछले चार सालों से प्राकृतिक आपदा की मार झेल रहे गरीब किसानों की स्थिति दयनीय बनी हुई है तो वहीं दूसरी ओर समिति प्रबंधकों के गोलमाल से उन्हें दोहरी मार पड़ रही है। ऐसा ही एक मामला बकस्वाहा क्षेत्र से सामने आया है जहां सर्मथन मूल्य पर दो वर्ष पूर्व उड़द खरीदी करने के बाद कुछ किसानों को बाजार भाव से भी कम दाम तथा कुछ किसानों को एक भी पैसा नहीं मिला है। मजबूर किसान अधिकारियों के चक्कर काटकर परेशान हो गए हैं। किसानों ने ज्ञापन से लेकर अनशन तक के सारे रास्ते अपना लिए हैं लेकिन उनके हाथ आज भी खाली हैं।

क्या है मामला

लगभग दो साल पूर्व किसानों ने अपनी उड़द की तौल शासकीय समर्थन मूल्य योजना के तहत सेवा सहकारी समितियों के माध्यम से उड़द फसल का उपार्जन केंद्रों पर समितियों प्रबधकों और नमूना जांच अधिकारी की देखरेख में कराया गया था जिसका सर्मथन मूल्य 5600 रुपया क्विंटल रखा गया था। इसके बाद लगभग एक साल बीतने के बाद किसानों को 3575 रुपये के हिसाब से राशी मिली जबकी कई किसान ऐसे भी हैं जिन्हें दो साल बाद भी पैसा नहीं मिल सका है। किसानों को आस थी कि उपज का बाजार भाव से अधिक मूल्य मिलने से उनकी स्थिति में सुधार होगा और शासन की मंशा भी यही थी लेकिन किसानों की उपज का समर्थन मूल्य तो दूर उपज का पैसा तक नहीं मिला है। 

किसान के कोड पर नहीं हुई फीडिंग, प्रबंधक बोले आ जाएंगे पैसे

भुजपुरा निवासी किसान मखौआ अहिरवार ने बताया कि उसने 2 वर्ष पूर्व सेवा सहकारी समिति बम्हौरी मे किसान कोड-218230441033 पर 30 बोरी उड़द भरी थी जिसका पैसा 2 साल बीत जाने के बाद भी नहीं मिला है। केंद्र प्रभारी अरविंद व्यास तथा संतोष बैध से इस बारे में बात की गई तो उन्होंने बताया कि पैसा अगले माह खाते में आ जाएगा। जबकि किसान द्वारा जब अपने कोड की जांच कराई गई तो पता चला कि उस पर उपज की फीडिंग हुई ही नहीं है। उसकी उपज किसी और के कोड पर भर दी गई। जब किसान ने तहसीलदार को आवेदन दिया तो उन्होंने कहा कि थाने में रिपोर्ट दर्ज कराएं। किसान की सीएम हेल्पलाइन में भी शिकायत लंबित हैं। इसी तरह गज्जू साहू ने बताया कि उसने 11 क्विंटल 56 किलो उपज भरी थी। एक साल का इंतजार करने के बाद उसे 3575 रुपया क्विंटल के हिसाब से पैसा दिया गया जिस कारण उसे 2025 रुपए प्रति क्विंटल का नुकसान हुआ है।

इनका कहना

मेरे पास इस संबंध में शिकायतें आई हैं, जांच करवाते हैं, दोषियों के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी।

त्रिलोक सिंह पौषाम, तहसीलदार

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