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विश्वासघात से आहत कांग्रेस ने तैयार की चुनावी बिसात उपचुनाव में भाजपा को पटकनी देने की रणनीति तैयार

मुकेश चतुर्वेदी

एक तरफ खरीद फरोख्त के सहारे भाजपा ने चौथी बार मध्यप्रदेश में अपनी सरकार बना डाली, तो वहीं दूसरी ओर कांग्रेस आलाकमान सहित तमाम रणनीतिकारों के लिए अपनों का विश्वासघात सबसे बड़ा सदमा बन गया है। ग्वालियर राजघराने के ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने राजनैतिक भविष्य को देखते हुए कांग्रेस पार्टी के साथ विश्वासघात करने का फैसला लिया। पंद्रह सालों के लंबे परिश्रम के बाद मध्य प्रदेश की जनता ने सबसे ज्यादा जनादेश सौंपते हुए कांग्रेस को सत्ता के सिंहासन पर विराजमान किया था। कांग्रेस आलाकमान के निर्देश पर वरिष्ठ कांग्रेसी और पूर्व केंद्रीय मंत्री कमलनाथ को मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री चुना गया। जबकि विधानसभा चुनाव में धनबल का सहयोग न करने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मुख्यमंत्री पद के लिए दावेदारी पेश की थी। जब कमलनाथ ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, तभी से ज्योतिरादित्य सिंधिया का मन कांग्रेस से किनारा करने के लिए बनने लगा। सालों पुरानी कांग्रेस पार्टी के साथ विश्वासघात करने के लिए ज्योतिरादित्य सिंधिया तैयार हो गए। मध्य प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनने के उपरांत लोकसभा चुनाव 2019 का समय आया। इस लोकसभा चुनाव में पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया अपनी ही सीट से तकरीबन डेढ़ लाख मतों से चुनाव हार गए। मजेदार बात यह है कि राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया को चुनावी मैदान में पटकनी देने वाला कोई और नहीं बल्कि उन्हीं का वाहन चालक रहा। जब कांग्रेस आलाकमान ने मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी मुख्यमंत्री कमलनाथ को सौंप दी तो ज्योतिरादित्य सिंधिया के बगावती तेवर खुलकर सामने आ गये। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने सर्मथक 22 विधायकों को इस्तीफा देने का फरमान जारी कर दिया। अचानक हुए इस विश्वासघात ने पूरी कांग्रेस पार्टी को भौंचक्का कर दिया। अल्पमत में सरकार आने के कारण मुख्यमंत्री कमलनाथ को इस्तीफा देना पड़ा। सरकार जाने के बाद से कांग्रेस पार्टी ने उपचुनाव के लिए चुनावी बिसात बिछाना शुरू कर दिया।

27 विधानसभा सीटों पर होंगे उपचुनाव, तैयारियां तेज
मध्य प्रदेश की सियासत पर उठा पटक का सिलसिला फिलहाल समाप्त होने वाला नहीं है। 24 मार्च 2020 को भाजपा ने चौथी बार मध्यप्रदेश में अपनी सरकार बनाई। सत्ता के सिंहासन पर काबिज रहने के लिए भाजपा को मध्य प्रदेश की 27 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव को बेहतर तरीके से जीतना होगा तभी सरकार सलामत रह पाएगी। धमाकेदार प्रदर्शन करने की उम्मीद भाजपा के लिहाज से कम ही नजर आ रही है। फिर भी भाजपा सरकार और संगठन मध्य प्रदेश में भाजपा सरकार को बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास करने में लगा हुआ है। मध्य प्रदेश के ग्वालियर और चंबल संभाग की 27 सीटों पर विधानसभा के उपचुनाव का आयोजन कराने की सरकारी तैयारियां तेज हो गई है। निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि मध्य प्रदेश में विधानसभा के उपचुनाव सही समय पर करवाए जाएंगे। भाजपा सरकार और संगठन ने उपचुनाव को लेकर प्रचार प्रसार शुरू कर दिया है। उधर कांग्रेस पार्टी सत्ता के सिंहासन पर वापसी करने के लिए एक एक कदम फूंक-फूंक कर रख रही है। अपनों के विश्वासघात से आहत कांग्रेस पार्टी अब विश्वास के झमेले में पड़ने वाली नहीं है। 27 सीटों पर होने वाले उपचुनाव की सारी तैयारियां को पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपने हाथों में ले रखी है। ग्वालियर में एक आलीशान घर खरीदा गया है और वहीं से उपचुनाव की सारी गतिविधियां संचालित हो रही हैं।

बेंच दिया जनादेश इसलिए प्रचार प्रसार में विरोध जारी
साल 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में जनता जनार्दन ने बड़बोले माई के लाल शिवराज सिंह चौहान को सबक सिखाते हुए सत्ता के सिंहासन से उतार दिया। कांग्रेस को सबसे बड़ा जनमत देकर सत्ता के सिंहासन की जिम्मेदारी जनता ने सौंपी। पंद्रह सालों के लंबे इंतजार के बाद कांग्रेस को सरकार बनाने का अवसर जनता ने सौंपा। कमलनाथ ने मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी संभाली। सबकुछ ठीक ठाक चल रहा था कि अचानक अपने ही बागी तेवर दिखाने लगे। जब दबाव बनाने के बाद भी कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष की जिम्मेदारी ज्योतिरादित्य सिंधिया को नहीं सौंपी गई तो विश्वासघात करने का फैसला लिया गया। भाजपा आलाकमान से डील फाइनल करने के उपरांत कांग्रेस सरकार में शामिल ग्वालियर और चंबल संभाग के 22 बागी विधायकों से इस्तीफा दिलवाया गया। जिसके कारण सरकार अल्पमत में आ गई और मुख्यमंत्री कमलनाथ को इस्तीफा देना पड़ा। कांग्रेस के 22 बागी विधायकों की खरीद-फरोख्त 35-35 करोड रूपए में होने की सूचना बाहर आते ही चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया। जन जन तक राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके 22 सर्मथक विधायकों की सच्चाई पहुंचते ही जनता जनार्दन के बीच में बिकाऊ नहीं टिकाऊ चाहिए का नारा गूंजने लगा। यही वजह है कि जिन 27 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने है वहां पर भाजपाई कैंडिडेट्स का पुरजोर विरोध करते हुए जनता अपने क्षेत्र से भगाने का काम कर रही है।

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